चारण नारायण सिंह गाडण ट्रस्ट (देशनोक) डांडूसर की ओर से हार्दिक स्वागत
   
   
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आत्म निवेदन (ट्रस्टी का संदेश):-

सर्वप्रथम आराध्या देवी मां भगवती श्री करणी जी महाराज के पावन चरणों में कोटि- कोटि वंदन, जिनकी कृपा से आपके समक्ष यह वेबसाईट लेकर उपस्थित होने का सुअवसर प्राप्त हुआ। सामाजिक विकास में ही व्यक्ति का विकास निहित है, क्योंकि समाज में ही व्यक्ति का निर्माण एवं निर्धारण होता है। सामाजिक हित की मनोवृत्ति से ही आगे जाकर विश्व बंधुत्व एवं वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का अभ्युदय होता है। किसी भी समाज का गौरव और गरिमा, अस्मिता एवं प्रतिष्ठा उस समाज में जन्में महापुरुषों, विद्वानों तथा समाजसेवियों के कारण होती है। अपने महान पूर्वजो द्वारा प्रदत्त उस पुनीत विरासत को अक्षुण्य रखना हमारा कत्र्तव्य है। इस वेबसाईट निर्माण के पीछे भी वही भावना छिपी हुई है।
मेरे पितामह पूज्यवर स्व. ठा. मुकुन्ददान जी गाडण की प्रेरणा से मेरे पूज्य पिता स्व. ठा. नारायणसिंह जी गाडण ने सन् 1988 में भगवती श्री करणी जी महाराज की पावन तपोस्थली देशनोक में -’’चारण नारायण सिंह गाडण ट्रस्ट’’ की स्थापना कर समाज सेवा के क्षेत्र में एक नये आयाम को जोड़ा। यह ट्रस्ट तब से लेकर निरन्तर सेवारत है। मेरे पूज्य पिता स्व. नारायणसिंह जी ने अपने विद्यार्थी जीवन में कई बार छात्रवृत्ति प्राप्त की थी इसलिए वे छात्रवृत्ति के महत्व को बहुत गहराई से समझते थे। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में ही यह दृढ़ निश्चय कर लिया था कि ’’मां भगवती श्री करणी जी महाराज ने मुझे अपने जीवन में कभी अवसर दिया तो मैं बालक - बालिकाओं के प्रोत्साहन हेतु छात्रवृति प्रदान करने के क्षेत्र में कुछ कार्य अवश्य करूंगा।’’ इस ट्रस्ट की स्थापना के पीछे उनकी यही भावना काम कर रही थी।
इस ट्रस्ट के गठन की रूपरेखा एवं संरचना में जिन-जिन महानुभावों ने सक्रिय योगदान प्रदान किया हैैं मैं यहां उनका उल्लेख करना आवश्यक समझता हूँ। इस श्रृंखला में भगवती श्री करणी जी महाराज के वंशज एवं राजस्थानी के मूर्धन्य साहित्यकार स्व. मूलदान जी देपावत का नाम अग्रगण्य है। उनके अतिरिक्त श्री अम्बादान जी देपावत, स्वर्गीय श्री केशवदान जी सिंढायच, श्री अविनाशजी देपावत, श्री लिच्छूदान जी देपावत, श्री जगमालदान जी देपावत का अनूठा योगदान रहा है एवं स्व. श्री केशवदान जी सिंहढ़ायच के स्वर्गवास के बाद उनके सुपुत्र श्री कीर्ति कुमार जी सिंहढ़ायच का भी योगदान सराहनीय है, जो स्तुत्य है। साथ ही साथ श्री करणी मन्दिर निजी प्रन्यास के समस्त पदाधिकारियों एवं करणीजी महाराज के वंशज समस्त देपावत परिवार ने भी अविस्मरणीय सहायोग प्रदान किया है। इसके लिये मैं सदैव इनका ऋणी रहूंगा। उपर्युक्त सभी महानुभावों ने पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम निर्धारित करते हुए मां भगवती श्री करणी महाराज की जयन्ती के अवसर पर आश्विन शुक्ला सप्तमी के दिन को चुना।
1988 से लेकर 1997 तक पुरस्कार वितरण समारोह के आयोजन मेरे पिता एवं इस ट्रस्ट के संस्थापक स्व. नारायण सिंह जी गाडण की देखरेख में सम्पन्न हुए। सन 1997 में उनका देहावसान हो जाने के पश्चात इस गुरूतर कार्य की जिम्मेदारी मेरे कमजोर कंधों पर आ गई। परन्तु मां भगवती की कृपा एवं करणी मंदिर निजि प्रन्यास तथा देपावत परिवार के सक्रिय सहयोग से मेरा कार्य बहुत सुगम हो गया। कभी कोई कठिनाई आई ही नहीं क्योंकि जहां मां की कृपा बरसती हो, वहां कोई कठिनाई कैसे आ सकती है। विगत दस वर्षो से श्री करणी मन्दिर निजि प्रन्यास देशनोक भी प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की हौशला अफजाई के लिये पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति का वितरण करता है। तभी से संयुक्त रुप से एवं सादगीपूर्ण ढंग से पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन मां भगवती के प्रांगण में सतत रूप से आयोजित हो रहा है।
इस समारोह में प्राप्त पुरस्कार की राशि कम हो सकती है परन्तु करणी जी महाराज के जन्म दिवस पर और देशनोक जैसे गरिमामय प्रांगण में प्राप्त इस पुरस्कार की अहमियत इतनी अधिक हो गई है कि इस पुरस्कार को भगवती श्री करणी जी महाराज का प्रत्यक्ष आशीर्वाद समझा जाने लगा है। वास्तव में यह भगवती की कृपा का ही फल है। इस पुरस्कार समारोह की लोकप्रियता के लिए मैं समूचे चारण समाज को साधुवाद ज्ञापित करना चाहूंगा। ट्रस्ट की स्थापना के प्रथम आयोज्य पुरस्कार समारोह में जहां 22 छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया था वहीं गत 2010 के समारोह में पुरस्कृत होन वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़कर 559 हो गई। यह इस पुरस्कार समारोह की लोकप्रियता का जीवन्त प्रमाण है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि पुरस्कृत होने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में बालिकाओं की संख्या सदैव ही बढ़ती रही है और हो भी क्यों नहीं क्योंकि हमारे समाज में बेटियों को सदैव से सुहासनी अथवा साक्षात भगवती स्वरुपा ही समझा जाता है। उन्होने अपने इस विरुद को ही साकार किया है कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
इस ट्रस्ट के संस्थापक एवं मेरे पिता स्व. श्री नारायण सिंह जी गाडण ने अपने जीवनकाल में कई सामाजिक कार्य सम्पन्न किये। जिसमें प्रमुखतः डांडूसर गांव में तालाब खुदवाना, गांव में श्री करणी मन्दिर का निर्माण करवाना एवं सत् साहित्य का प्रकाशन विशेष उल्लेखनीय है। उन्होंने महाकवि केशवदास गाडण की प्रसिद्ध काव्यकृति -’विवेकवार निसांणी‘ जो कि पाण्डुलिपि के रूप में उपलब्ध थी, का प्रकाशन करवाया तथा नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के क्रम में करणी कीरत नामक पुस्तक का प्रकाशन भी करवाया। उनकी बीकानेर चारण समाज की निर्देशिका छपाने की प्रबल इच्छा थी परन्तु यह कार्य उनके जीवन काल में सम्पन्न नहीं हो सका। इनकी इस इच्छा को मैंने उनकी प्रेरणा के सन्दर्भ में लेकर निर्देशिका का प्रकाशन करवाया तथा उनकी द्वितीय पुण्य तिथि के अवसर पर श्रद्धांजली स्वरूप विमोचन करवाया। इस पुस्तक का नाम चारण समाज बीकानेर रखा गया। करणी षटशती सभागार में इस निर्देशिका का विमोचन तत्कालीन राज्यसभा सांसद माननीय औंकारसिंह जी लखावत एवं प्रसिद्ध साहित्यकार पद्म श्री डॉ. चन्द्रप्रकाश जी देवल ने किया।
ट्रस्ट की तमाम गतिविधियों के आयोजन में समूचे चारण समाज, देपावत परिवार देशनोक, करणी मन्दिर निजि प्रन्यास के समस्त पदाधिकारी तथा चारण नारायण सिंह गाडण ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष श्री अम्बादान जी देपावत, उपाध्यक्ष लक्ष्मण दान जी देपावत, सचिव श्री गिरीश जी हिन्दुस्तानी, सदस्य श्री लक्ष्मणदानजी बीठू, सदस्य श्री जगमाल दान जी देपावत, वरिष्ठ ट्रस्टी एवं कोषाध्यक्ष श्री लक्ष्मणदान जी देपावत का सतत् योगदान मेरे एवं मेरे परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मैं इनके प्रति सदैव आभारी रहूंगा।
आज कम्प्यूटर का युग है। ऐसे में मेरे मन में एक वेबसाइट तैयार करने का विचार उपजा। मैं अपने दादोसा एवं दादीसा तथा पिताजी एवं माताश्री को एक रचनात्मक श्रद्धांजली देने के उद्देश्य से यह वेबसाइट बनवा कर समाज को समर्पित कर रहा हूँ। इस वेबसाइट में विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश ड़ालने का प्रयास किया है जैसे भगवती श्री करणी जी महाराज के विभिन्न धामों के विषय में विस्तार से अधिकृत जानकारी हेतु ‘मां करणी के विभिन्न धाम, आलेख को पिरोया है। वहीं दूसरी और इस ट्रस्ट के संस्थापक नारायण सिंह जी गाडण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित आलेख ‘गाडण गुण भण्डार‘ को सम्मिलित किया गया है। इसी प्रकार समूचे राजस्थान निवासी चारणों की तहसीलवार एवं जिलेवार जानकारी को भी इस वेबसाइट की विषय वस्तु बनाया गया है एवं सन् 1988 से सन् 2010 तक चारण नारायण सिह गाडण ट्रस्ट देशनोक से सम्मानित होने वाले छात्र-छात्राओं का विस्तृत व्यौरा भी इस वेबसाइट मे संजोया गया है। वस्तुतः हमारे द्वारा तैयार यह वेबसाइट एक छोटा सा प्रथम प्रयास है। इसलिए इसमें अनेक प्रकार की खामियां - त्रुटियां रहना स्वाभाविक है। समाज के गुणीजनों - विद्वानों से सादर अनुरोध है कि वे इस वेबसाइट में सुधार हेतु उपयोगी सुझाव देकर मार्गदर्शन देकर हमें अनुगृहीत करें।
प्रतिवर्ष आसोज माह के शारदीय नवरात्री की सप्तमी को आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में पधारने वाले स्वजातीय सज्जनों के प्रति भी हम तहे दिल से आभारी हैं।
यह वेबसाइट मैं अपने दादोसा, दादीसा, पिताजी एवं माताजी की पावन स्मृति में उन्हीं को श्रद्धांजली स्वरूप समर्पित करता हूँ।

सादर आभार:-
(1) श्री भंवर पृथ्वीराज जी रतनू - दासौड़ी आलेख लेखन- ‘मां करणी के विभिन्न धाम’।
(2) श्री जगदीश जी रतनू - दासौड़ी
प्रस्तावना एवं आलेख लेखन - ‘गाडण गुण भण्डार‘।
(3) श्री डूंगरदान जी बीठू - सींथल
ट्रस्ट की गतिविधियों सम्बन्धी जानकारी।
(4) श्री शैतान सिंह जी कविया - काशी का बास
शेखावाटी अंचल के चारण गांवों की जानकारी।
(5) श्री राजेन्द्र सिंह जी खिड़िया - कुशलपुरा।
मारवाड़ एवं अन्य क्षेत्रों के चारण गांवों की जानकारी।
(6) श्री कर्णसिंह जी झीबा - अरडूसिया
काठेडा क्षेत्र के चारण गांवों की जानकारी।
वेबसाइट निर्माण में उपर्युक्त विद्वान महानुभावों ने जो सक्रिय रचनात्मक सहयोग प्रदान किया हैं। इसके लिए आपका सादर हार्दिक आभार एवं कोटि - कोटि साधुवाद।

विनीत
जगदीश राज सिंह गाडण
शुभम सिंह गाडण

डांडूसर