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प्रस्तावनाः-
भगवती श्री करणी जी महाराज की असीम अनुकम्पा, अपने स्वर्गीय पिता श्री मुकुन्ददान जी गाडण (डांडूसर) की पावन प्रेरणा तथा देपावत कुटुम्ब के सक्रिय योगदान से इष्टदेवी श्री करणी जी महाराज की पवित्र लीला स्थली देशनोक में वरिष्ठ समाज सेवक श्री नारायण सिंह जी गाडण ने 15 फरवरी 1888 को चारण नारायण सिह गाडण ट्रस्ट की स्थापना कर समाज सेवा के क्षेत्र में एक नये अध्याय का सूत्रपात किया। चूंकि श्री नारायण सिंह जी गाडण लम्बे समय से समाज सेवा के कार्यो में जुड़े हुए व्यक्ति थे। इसलिए उनके मानस में सामाजिक क्षेत्र में कुछ विशिष्ट एवं अनुठा कार्य करने की योजना उमड़ - घुमड़ रही थी। वस्तुतः यह ट्रस्ट उन्हीं मनोभावों की अभिव्यक्ति हैं। उन्हें इस बात का व्यावहारिक अनुभव था कि एक छोटा सा प्रोत्साहन एवं सम्मान व्यक्तित्व की कायापलट कर सकता है। क्योंकि बूंद को समुद्र और चिंगारी को दावानल बनने में अधिक देरी नहीं लगती। इसी भावना से प्रेरित होकर इस ट्रस्ट की स्थापना हुई।
चारणों को सदैव सरस्वती का वरद पुत्र, देवीपुत्र तथा बालिकाओं को सुहासनी (भगवती की सहोदरा बहिन) की संज्ञाओं से विभुषित किया जाता रहा है। क्योंकि हमारी पहचान ही शिक्षा एवं विद्या के कारण है। अशिक्षा समस्त समस्याओं की जननी एवं शिक्षा सम्पूर्ण समस्याओं का समाधान है। इसलिए इस ट्रस्ट का प्रमुख उद्देश्य चारण जाति के होनहार युवा वर्ग एवं प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों हेतु श्री करणी मंदिर प्रांगण देशनोक जैसे गरिमामय मंच से सम्मानित कर समाज के नव निर्माण में उनकी भूमिका एवं उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना है।
15 फरवरी 1988 से लेकर अब तक सतत् रुप से कार्यरत यह संस्था मां भगवती श्री करणी जी महाराज की कृपा से अपने लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की सफल प्राप्ति की दिशा में निरन्तर अग्रसर है। इस सफलता के पीछे समूचे चारण समाज का अनुठा योगदान रहा, क्योंकि इस संस्था द्वारा प्राप्त सम्मान को भगवती के आशीर्वाद स्वरुप की मान्यता चारण समाज ने ही प्रदान की है। श्री करणी मन्दिर निजि प्रन्यास देशनोक का संरक्षण, समस्त देपावत कुटुम्ब देशनोक का सक्रिय सहयोग एवं सम्पूर्ण चारण समाज की भागीदारी, यही इस संस्था की धरोहर है। भगवती श्री करणी महाराज की छत्रछाया इसी प्रकार बनी रहे, यही मनोकामना है।
आज विज्ञान का प्रगतिशील युग है। ज्ञान के दायरे एवं सृजन के सूत्र बदल रहे है। विश्व की सम्पूर्ण जानकारियाँ कंम्प्यूटरीकृत हो गई हैं। ऐसे में मेरे परममित्र, इस ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं स्व. नारायण सिंह गाडण के सुपुत्र श्री जगदीश राज सिंह जी गाडण ने इस क्षेत्र में कुछ विशिष्ट कार्य करने का बीड़ा उठाया। यह वेबसाइट वस्तुतः उन्हीं की सद्भावना एवं कर्मठता की परिणिती है। उन्होंने अपनी अस्वस्थता की परवाह न करते हुए - ’चारण नारायण सिंह गाडण ट्रस्ट देशनोक की समस्त गतिविधियों - उपलब्धियों को श्रृंखलाबद्ध कर इस वेबसाईट पर उपलब्ध कराया है। सम्पूर्ण राजस्थान निवासी चारणों के विषय में विपुल जानकारी जुटाकर आपने जो भागीरथ कार्य किया है इसके लिए आपको साधुवाद। जिन-जिन स्वजातिय महानुभावों ने इस कार्य में सहयोग प्रदान किया है वे सभी धन्यवाद के पात्र है। राजस्थान के चारणों की विस्तृत जानकारी ने वेबसाइट की विषय वस्तु को अत्यन्त समृद्ध कर दिया है। श्री जगदीशराज जी गाडण ने ही आर्थिक संसाधनों का प्रबन्ध किया है और उन्होंने ही वेबसाइट को सुव्यवस्थित रुप से बनाने में परिश्रम किया है। इस प्रकार उन्होंने दोहरा दायित्व निभाया है। साथ ही प्रबुद्ध साहित्यकार एवं समाज सेवक श्री भंवर पृथ्वीराज जी रतनू दासौड़ी ने अपने गहन के अध्ययन के आधार पर परिष्कृत एवं अधिकृत शैली में - ‘मां करणी के विभिन्न धाम’ आलेख तैयार कर इस वेबसाइट की विषय वस्तु में चार चांद लगा दिये है। इसलिए उनके प्रति बहुत-बहुत आभार। इस ट्रस्ट के संस्थापक स्व. नारायण सिंह जी गाडण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित आलेख - ‘गाडण गुण भण्डार‘ इन पंक्तियों के लेखक ने अपनी अल्प - बुद्धि के आधार पर लिख कर उन्हें श्रदांजलि देने का प्रयास किया है। जिसका मूल्यांकन आप जैसे गुणीजन करेंगे।
इतिशुभम
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